एक ज्वलन्त मुद्दे पर आधारित है मेरी हिंदी फिल्म “नमस्ते बिहार” राजन कुमार

बिहार से सम्बन्ध रखने वाले कलाकार राजन कुमार अब एक हिंदी फिल्म लेकर आ रहे हैं जिसका नाम है “नमस्ते बिहार”. फ़िल्म “नमस्ते बिहार” जल्द सिनेमाघरों में रिलीज़ के लिए तैयार है। किस तरह की फिल्म है फ़िल्म “नमस्ते बिहार”, उसमे उनका किरदार कैसा है ? फिल्म का संगीत कैसा है? इन तमाम सवालों का जवाब दे रहे हैं राजन कुमार –

. राजन जी, पाठको को अगर आप थोडा सा अपने बारे में बताएं तो वे आपके बैक ग्राउंड के बारे में जान पायेंगे.
देखिये, मैं मुंगेर बिहार का हूँ. मेरे दादा जी अयोध्या प्रसाद सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे. इसी लिए देशभक्ति की भावना शायद शुरू से दिल में है. अपनी पढाई मैंने हजारीबाग से की है. एक किसान परिवार से सम्बन्ध रखते हुए भी मैं बचपन से ही गाँव में होने वाले नाटको में भाग लिया करता था. 1998 में एक्टर बनने के लिए घर से भाग कर मुंबई आए लेकिन संघर्ष देख कर लगा कि एक्टिंग की ट्रेनिंग ज़रूरी है, इसलिए एक्टिंग की ट्रेनिंग लेने वापस चला गया. लेकिन जब 2005 में दोबारा मुंबई आया तो तब से लगातार यही रह रहा हूँ.

पहली फिल्म कौन सी थी ?
मेरी पहली हिंदी फिल्म थी शहर मसीहा नहीं.

आपको चार्ली चैपलिन 2 का ख़िताब भी मिल चूका है, उसकी कहानी बताएं.
रंगमंच में डिप्लोमा करने के बाद दिल्ली में एक दोस्त के रेस्टुरेंट के उद्घाटन समारोह में मैं ने चार्ली चैपलिन बन कर वहां लोगों का मनोरंजन किया. यह 2000 की बात है. उसके बाद लोग मुझे चार्ली चैपलिन 2 के नाम से जानने लगे. अब तक 4130 लाइव शोज़ कर चूका हूँ. मेरे शोज़ 3 से 13 घंटे के होते हैं. चार्ली चैपलिन 2 के लिए मेरा नाम 2004 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स और 2005 में गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज हुआ. दिल्ली के नेशनल परेड में 3 बार आर्टिस्ट लीडर के रूप में बिहार हरियाणा की झांकी पेश कर चूका हूँ.

अपनी फिल्म “नमस्ते बिहार” के बारे में बताएं, आपकी भूमिका इस में क्या है ?
यह फिल्म बिहार के एक निडर और बेबाक नवयुवक डब्लू की कहानी है. डब्लू का किरदार फ़िल्म में मैं ने निभाया है. डब्लू बड़ा प्रतिभाशाली लड़का है, लेकिन कुछ दबंग उसे गुमराह करके क्राइम की दुनिया में ले जाते हैं. लेकिन डब्ल्यू के भी अपने उसूल है, आदर्श हैं. वह गुंडागर्दी भी करता है मगर उसका अपना एक तरीका भी है. समाज मे लोग उसकी इज्ज़त भी करते हैं.

क्या इस फिल्म में रोमांटिक एंगल भी है ?
जी हाँ. डब्लू रेशमी सिन्हा नामक एक लड़की की बड़ी इज्ज़त करता है. रेशमी एक सच्ची पत्रकार है जो बिहार में काम करने के इरादे से दिल्ली से आती है. वह “नमस्ते बिहार” नामक एक बेबाक अखबार की क्राईम जर्नलिस्ट है और डब्लू उनकी लेखनी का दीवाना है. रेशमी का किरदार फिल्म में कलिता ने निभाया है.

बॉलीवुड में आजकल ज्वलंत मुद्दों पर फिल्मे बनाई जा रही हैं. क्या इस फिल्म में भी कोई मुद्दा है ?
डब्लू सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन जब बात बिहार की अस्मिता की हो तो वह किसी भी खतरे को मोल लेने के लिए तैयार रहता है. फ़िल्म में ऐसी घटनाएं घटती है कि वह बिहार के दुश्मनों के लिए मोर्चा खोल देता है.

फिल्म की शूटिंग कहाँ कहाँ की गई है ?
एक्शन और इमोशन से भरपुर इस फ़िल्म में बिहार की शानदार लोकेशन्स देखी जा सकेगी. इस फ़िल्म में गांव की सभ्यता संस्कृति को दिखाने का प्रयास बखूबी किया गया है. नालंदा, राजगीर, मुंगेर, जमालपुर, बारिचक गांव, और पटना सहित बिहार के कई स्थानों को लोग इस फिल्म में देखेंगे.

तकनीकि तौर पर आज सिनेमा बहुत आगे बढ़ गया है, आपकी फिल्म इस मामले में कितनी अपटूडेट है ?
फ़िल्म को चार कैमरे के सेटअप के साथ शूट किया गया है. कुछ शॉट्स ड्रोन के ज़रिए टॉप एंगल से लिए गए हैं, जिससे बिहार और भी शानदार नज़र आता है. इस फ़िल्म के द्वारा बिहार टूरिज़्म को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है.

क्या इस फिल्म में बिहार के लोगों को भी काम करने का मौका मिला है ?
बिहार के 80 प्रतिशत कलाकारों और टेक्नीशियन्स से सजी है यह फ़िल्म. यह फिल्म बिहार के लोगों को बिहारी होने का एहसास जगाएगी. वह गर्व से कहेंगे कि हम बिहारी हैं.

इस फिल्म की यूएसपी क्या है ?
इसमें दुसरे राज्यों के लोगों का 30 दिनों तक शूटिंग करने के बाद बिहार को लेकर नजरिया ही बदल गया. फिल्म के सिनेमाटोग्राफर अनिल बघेला हैं, एक्शन डायरेक्टर चेन्नई के हैं, डांस डायरेक्टर गौरव कौशिक मुंबई के हैं, दिल्ली के प्रोडक्शन मैनेजर जितेन्द्र सिंह हैं, झारखण्ड के खलनायक मनोज सिन्हा हैं, लखनऊ से सेकण्ड लीडिंग लेडी शांति हैं, हिरोइन भूमिका में आसाम की कलिता हैं.

फिल्म के गीत संगीत के बारे में क्या कहना चाहेंगे ?
अमन श्लोक संगीतकार हैं. कुल 6 गीत हैं. इस फ़िल्म का एक गीत बिहार एंथम है. दो रोमांटिक, एक सैड सोंग, और एक आईटम नम्बर है.


(समरजीत)